Jo Hota Hai Achcha Hota Hai... | Nirankari Story Time | Ep. 7



एक खेत के पास विशाल पीपल का पेड़ था। खेत में कदृदू की बेलें थीं जिनमें मोटे और बड़े-बड़े कदू लगे हुए थे। पीपल और कदुओं में जान-पहचान हो गई।

एक दिन पीपल बहुत उदास था। कद्दुओं ने जब पीपल को उदास देखा तो कदू ने पूछा-"पीपल भैया, आज आप उदास क्यों हो?"

"नहीं ... नहीं ... कोई विशेष बात नहीं है।" पीपल ने उदास मन से उत्तर दिया।

कदू बोला - "आप तो सदा हँसते-मुस्कुराते रहते हो, आज कोई तो बात है।"

पीपल ने कहा- "मैं इसलिए उदास हूँ कि मेरी काया तो इतनी विशाल है किन्तु मेरे फल बिल्कुल छोटे-छोटे। मुझे अपने आप से घृणा सी हो गई है।"

"बात तो तुम ठीक कह रहे हो भैया। आपकी बात क्या? आप हमें ही देख लो। हम इतने मोटे और बड़े हैं जबकि हमारी बेल बिल्कुल कमजोर। जो अपने सहारे खड़ी भी नहीं हो सकती। हमें इन बेलों को देखकर शर्म आती है। हमको तो आप जैसे पेड़ों के फल होने चाहिए थे।" कदू ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा।

पीपल बोला- "काश! तुम मेरी शाखाओं पर लटके हुए होते और मेरे ये नन्हें-नन्हें फल तुम्हारी बेलों पर।"

उस पीपल के पेड़ के नीचे एक महात्मा आराम कर रहे थे। उन्होंने कद्दू और पीपल की बात सुन ली। वे उठकर पीपल से बोले-"पीपल भैया, तुम्हारे मन की बात मैंने सुन ली किन्तु भैया ईश्वर ने प्रत्येक पेड़-पौधे, जीव-जन्तुओं को बड़ा सोच-समझकर बनाया है। इसमें हम सबकी भलाई छिपी रहती है।"

"कैसी भलाई महाराज? कम से कम उनके आकार-प्रकार, कद-काठी का तो ईश्वर को ध्यान रखना चाहिए था।" पीपल ने ईश्वर को कोसते हुए कहा।

कदू भी बिना बोले नहीं रहा। वह बोला-"भलाई-वलाई कुछ नहीं महाराज! ये तो ईश्वर का अन्याय है।"

"नहीं कदू भाई ऐसा मत बोलो। ईश्वर हम सबका जन्मदाता है।" महात्मा ने कदू से कहा।

पीपल ने महात्मा की आदर्श बातें सुनकर कहा- "महाराज! आप तो ईश्वर के उपासक हैं। आप हमें ऐसा वरदान क्यों नहीं देते जिससे मेरी शाखाओं पर कदू लटक जाएं और मेरे फल इन बेलों पर लग जाएं।"

"पीपल भैया प्रकृति के नियम को बदलना अन्याय है। वरदान तो मैं दे सकता हूँ किन्तु ईश्वर के कानून को बदलना हम सबके लिए हानिकारक हो सकता है।" महात्मा जी ने समझाते हुए कहा।

"महाराज, हमारी हानि की चिन्ता बिल्कुल मत करो। कृपया आप हमें वरदान दे दो। मैं और कदू आपके सदा आभारी रहेंगे।" पीपल ने प्रार्थना करते हुए कहा।

महात्मा जी को उन पर दया आ गई और प्रभु स्मरण कने लगे। थोड़ी देर में सब कुछ बदल गया। पीपल के पेड़ पर कदू लटक गये और बेलों पर पीपल के लाल-लाल छोटे-छोटे फल। पीपल और कदू बड़े खुश हुए।

महात्मा को उन्होंने धन्यवाद दिया। महात्मा अपना कमण्डल उठाकर चले गये। दूसरे दिन जब किसान मंडी में बेचने के लिए कदुओं को तोड़ने आया तो उसे बड़ा आश्चर्य हुआ। उसने सोचा कि मेरे खेत की फसल खराब हो गई। अतः इन बेलों को उखाड़ने में ही भलाई है। उसने सारी बेलों को जड़ से उखाड़ दिया और दूसरी फसल बोने का निर्णय कर लिया।

उधर आते-जाते यात्री परेशान। क्योंकि जो भी पीपल के नीचे से गुजरता उसी पर कदू टूटकर गिर जाता। वे घायल होने लगे। एक दिन एक बढ़ई वहाँ से गुजरा। एक बड़ा-सा कद्दू बढ़ई के ऊपर आकर गिरा। उसका सिर फूट गया। उसने गाँववालों को कद्दू की घटना बताई। गाँववालों ने उस पीपल को काटने का निर्णय ले लिया। अगले दिन बढ़ई अपने कुछ साथियों के साथ आया और पीपल को काटने लगा। पीपल बड़ा दुःखी हुआ। उसने कदुओं को भला-बुरा कहा तो कदुओं ने भी कहा कि तुम्हारे कारण तो किसान ने हमारी बेलें ही काट दीं। दोनों में जोर-जोर से तकरार शुरू हो गई।

उसी समय वही महात्मा पीपल को आता दिखाई दिया। वह जोर से चिल्लाया। महात्मा ने पीपल की आवाज सुन ली। वे उसके पास आये।
महात्मा बढ़ई को देखकर समझ गये कि पीपल को क्यों काटा जा रहा है। पीपल रुआंसा होकर बोला- "महाराज, मुझे बचाओ।"

महात्मा बोले - "भैया मैंने तो पहले ही कहा था कि प्रकृति के नियम के विरुद्ध कोई काम करोगे तो हानि होगी।"

"मुझे तो वे नन्हें-नन्हें फल ही लौटा दो वरना ये लोग मुझे जड़ से काट डालेंगे।" पीपल ने गिड़गिड़ाते हुए कहा।

कद्दू भी बोले- "महाराज! हमें भी क्षमा करें और इस पीपल को अवश्य बचा लो। वरना हमारी गलती के कारण पेड़ पर रहने वाले पक्षियों के घर बर्बाद हो जायेंगे।"

महात्मा ने अपनी दिव्यशक्ति के द्वारा फिर से पीपल को छोटे-छोटे फलों से लाद दिया। कदू अपना अस्तित्व खो चुके थे। महात्मा ने बढ़ई को समझा दिया। अब पीपल अपने छोटे फलों के साथ खुश था।






सीख:
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि ईश्वर ने इस संसार की हर चीज़ को बड़ी समझदारी से बनाया है। हमें कभी भी अपनी स्थिति से असंतुष्ट होकर दूसरों जैसा बनने की इच्छा नहीं करनी चाहिए। जो कुछ हमें मिला है, उसी में हमारी भलाई छिपी होती है। इसलिए हमेशा याद रखें— जो होता है, वह किसी न किसी भलाई के लिए ही होता है। 

Dhan Nirankar ji 🙏🏻 🪷 
Voice By: Utkarsh Nirankari ji
Shared by The Humility Nirankari 
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