79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम की सेवा का शुभारंभ 20 सितंबर को..



समालखा, हरियाणा | 20 सितंबर 2026

सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज की कृपापूर्ण छत्रछाया में आयोजित होने वाले 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम की तैयारियां अब एक नए उत्साह और उमंग के साथ आगे बढ़ने जा रही हैं। इसी क्रम में 20 सितंबर 2026, रविवार को संत समागम की सेवा का विधिवत शुभारंभ संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल, समालखा, हरियाणा में किया जाएगा।

इस अवसर पर निरंकारी राजपिता रमित जी सेवा के शुभारंभ को अपने आशीर्वाद से धन्य करेंगे। कार्यक्रम भारतीय समयानुसार प्रातः 11:00 बजे से आरंभ होगा। निरंकारी राजपिता जी के आशीर्वाद के पश्चात उपस्थित संगत मुख्य पंडाल में एकत्र होकर साध-संगत का रूप लेगी, जहां सत्संग का आयोजन होगा। यह सत्संग दोपहर 3:00 बजे तक चलेगा।

संत समागम केवल एक विशाल आध्यात्मिक आयोजन का नाम नहीं, बल्कि यह वह अवसर है जहां हजारों-लाखों संगत सेवा, सत्संग और समर्पण की भावना से एक-दूसरे से जुड़ती है। समागम की तैयारियों में लगने वाली प्रत्येक सेवा अपने आप में महत्वपूर्ण है। चाहे व्यवस्था संभालना हो, स्वच्छता की सेवा हो, आने वाली संगत की सुविधा का ध्यान रखना हो या किसी भी अन्य रूप में अपना योगदान देना हो—हर सेवा समागम को सुचारु बनाने में अपनी भूमिका निभाती है।

सेवा का वास्तविक सौंदर्य इसी में है कि इसमें बड़ा या छोटा कोई कार्य नहीं होता। जब मन में समर्पण हो, तो छोटी-सी छोटी सेवा भी प्रेम और विनम्रता का माध्यम बन जाती है। अपने समय, श्रम और सामर्थ्य को समाज और संगत के लिए लगाना स्वयं में एक सुंदर अवसर है। इसलिए समागम की सेवा में अधिक से अधिक संगत को बढ़-चढ़कर सहभागी बनने और अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

इस वर्ष 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का विषय ‘जागृति – The Awakening’ रखा गया है। इस संदर्भ में समागम की सेवा भी एक विशेष संदेश अपने भीतर समेटे हुए है—बाहरी व्यवस्थाओं को तैयार करने के साथ-साथ भीतर के भावों को भी जागृत करना। सेवा मनुष्य को अपने से ऊपर उठकर दूसरों के लिए जीने, सहयोग करने और विनम्रता के साथ अपना योगदान देने की प्रेरणा देती है।

समागम की सेवा में जब अलग-अलग स्थानों से आए सेवादार एक साथ मिलकर कार्य करते हैं, तो वहां केवल व्यवस्थाएं नहीं बनतीं, बल्कि प्रेम, भाईचारे, सहयोग और एकत्व की भावना भी मजबूत होती है। यही सेवा की वह सुंदर भावना है जो किसी भी बड़े आयोजन को केवल आयोजन न रहकर एक सामूहिक अनुभव बना देती है।

20 सितंबर से आरंभ होने वाला यह सेवा पर्व आगामी 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम की तैयारियों को गति देगा। आने वाले दिनों में समालखा की धरती पर अनेक सेवाएं आकार लेंगी और संगत अपनी-अपनी श्रद्धा, सामर्थ्य और समय के अनुसार इन सेवाओं में सहभागी बनेगी।

आइए, इस अवसर को केवल समागम की तैयारियों के रूप में न देखकर सेवा के माध्यम से स्वयं को जोड़ने और अपने भीतर समर्पण की भावना को और गहरा करने के अवसर के रूप में देखें। हर हाथ जब सेवा के लिए आगे बढ़ता है और हर मन प्रेम से जुड़ता है, तभी एक विशाल आयोजन वास्तव में सामूहिक साधना का रूप लेता है।

79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम की सेवा का यह शुभारंभ, जागृति के उस संदेश को जीवन में उतारने की दिशा में एक सुंदर कदम है—जहां सेवा केवल कार्य नहीं, बल्कि प्रेम, विनम्रता और समर्पण की अभिव्यक्ति बन जाती है।

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